जय श्री वल्लभ, जय श्री विट्ठल, जय यमुना श्रीनाथ जी । कलियुग का तो जीव उद्धार्या, मस्तक धरिया हाथ जी..
चलो मन गंगा जमुना तीर, गंगा जमुना निर्मल पानी, शीतल होत शरीर...
फीता फीता फीता,,, जय हो! ओ ही लोग तर जाते,,, जय हो! जिन्होंने, माता का दर्शन किया।
महू ल तो थोकिन तै दुलार वो.. दाई, महू तोर दुलरवा लईका ताव ll भकती भजन ल तोर गाव वो हो.... दाई ll
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड तेरे द्वार खडे । पान सुपारी ध्वजा नारियल..
मन तेरा मंदिर आँखे दिया बाती, होंठो की हैं थालियां बोल फूल पाती, रोम रोम जिव्हा तेरा नाम पुकारती...
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे, हो रही जय जय कार मंदिर विच आरती जय माँ।