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Top Mandirs

  • Shri Rameswara Temple


    Shri Rameswara Temple

    श्री रामेश्वर मंदिर (Shri Rameswara Temple) is the group of six temples with the name of all Shri Dashrath sons and both Shri Ram sons.

  • Shri Radhanayanmani Ji Mandir

    To spread the message of Lord Sri Krishna Chaitanya Mahaprabhu श्री राधानयनमणी जी मंदिर (Shri Radhanayanmani Ji Mandir) was established on the birth place of Srila Bhakti Siddhanta Saraswati Prabhupada.

  • Konark Sun Temple

    UNESCO world heritage site कोणार्क सूर्य मंदिर (Konark Sun Temple) is dedicated to Bhagwan Shri Sury Dev.

  • Mausi Maa Temple

    मौसी माँ मंदिर (Mausi Maa Temple) is dedicated to Maa Ardhasini, therefore also called as Ardhasini Temple. Devotees believed that Devi Ardhasini together with Kapalamochana Shiva, act as the guardians of Puri.

  • Baba Bateshwarnath Dham

    बाबा बटेश्वरनाथ धाम (Baba Bateshwarnath Dham) is the series/group of ancient 101 Lord Shiv temples therefore called Dham. Hindus make pilgrimage to the river Yamuna in honour of Lord Shiva. Some of the temples have decorative ceilings and ornamental walls.

  • Shri Shauripur Bateshwar Digambar Jain Siddh Kshetra

    श्री शौरीपुर बटेश्वर दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र (Shri Shauripur Bateshwar Digambar Jain Siddh Kshetra) dedicated to Shri Neminath Bhagwan, kalyanaka/avtaran place of 22nd Teerthankara Bhagwan Neminath (Arishtanemi).

आरती: ॐ जय जगदीश हरे

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

श्री सत्यनारायण जी आरती

जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥

॥श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्रम् विष्णुपुराणान्तर्गतम्॥

सिंहासनगतः शक्रस्सम्प्राप्य त्रिदिवं पुनः। देवराज्ये स्थितो देवीं तुष्टावाब्जकरां ततः॥

॥दारिद्र्य दहन शिवस्तोत्रं॥

विश्वेश्वराय नरकार्णव तारणाय कणामृताय शशिशेखरधारणाय। कर्पूरकान्तिधवलाय जटाधराय दारिद्र्य दुःखदहनाय नमः शिवाय॥

भजन: तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान।

तेरे पूजन को भगवान, बना मन मंदिर आलीशान। किसने जानी तेरी माया...

राम का सुमिरन किया करो!

राम का सुमिरन किया करो, प्रभु के सहारे जिया करो...

ब्रजराज ब्रजबिहारी! इतनी विनय हमारी

ब्रजराज ब्रजबिहारी, गोपाल बंसीवारे, इतनी विनय हमारी, वृन्दा-विपिन बसा ले...

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम।

भारत के चार धाम
भारत के चार धाम

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चार वैष्णव तीर्थ हैं। बद्रीनाथ धाम, रामेश्वरम धाम, जगन्नाथ धाम, द्वारका धाम...

सप्त मोक्ष पुरी!
सप्त मोक्ष पुरी!

अयोध्या-मथुरामायाकाशीकांचीत्वन्तिका, पुरी द्वारावतीचैव सप्तैते मोक्षदायिकाः

दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान बालाजी मंदिर!
दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान बालाजी मंदिर!

List of leading Lord Hanuman temples of New Delhi, Noida, Ghaziabad. Hanuman Ji is great devotee of Shri Rama.

प्रार्थना: वह शक्ति हमें दो दया निधे!

उत्तर प्रदेश के साथ अधिकतर उत्तर भारत के सरकारी स्कूल में 1961 से ही गाई जाने वाली सबसे प्रसिद्ध प्रार्थना। वह शक्ति हमें दो दया निधे...

भगवान श्री चित्रगुप्त जी स्तुति - जय चित्रगुप्त यमेश तव!

जय चित्रगुप्त यमेश तव, शरणागतम् शरणागतम्। जय पूज्यपद पद्मेश तव, शरणागतम् शरणागतम्॥

श्री बजरंग बाण पाठ।

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

संकट मोचन हनुमानाष्टक

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।
वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥

श्री सूर्य देव

जय सविता जय जयति दिवाकर!, सहस्त्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥ भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!...

श्री चित्रगुप्त चालीसा

सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश। ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश॥

चालीसा: श्री बगलामुखी माता

सिर नवाइ बगलामुखी, लिखूं चालीसा आज॥ कृपा करहु मोपर सदा, पूरन हो मम काज॥

चालीसा: श्री हनुमान जी

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

श्री सत्यनारायण कथा - द्वितीय अध्याय
श्री सत्यनारायण कथा - द्वितीय अध्याय

सूत जी बोले: हे ऋषियों ! जिसने पहले समय में इस व्रत को किया था उसका इतिहास कहता हूँ, ध्यान से सुनो!...

श्री सत्यनारायण कथा - तृतीय अध्याय
श्री सत्यनारायण कथा - तृतीय अध्याय

सूतजी बोले: हे श्रेष्ठ मुनियों, अब आगे की कथा कहता हूँ। पहले समय में उल्कामुख नाम का एक बुद्धिमान राजा था।...

श्री सत्यनारायण कथा - चतुर्थ अध्याय
श्री सत्यनारायण कथा - चतुर्थ अध्याय

सूतजी बोले: वैश्य ने मंगलाचार कर अपनी यात्रा आरंभ की और अपने नगर की ओर चल दिए। उनके थोड़ी दूर जाने पर एक दण्डी वेशधारी...

किसका पुण्य बड़ा?

मिथलावती नाम की एक नगरी थी। उसमें गुणधिप नाम का राजा राज करता था। उसकी सेवा करने के लिए दूर देश से एक राजकुमार आया।

कर्ण की युद्ध में धर्म-नीति निष्ठा!

वह बाण बनकर कर्ण के तरकस में जा घुसा, ताकि जब उसे धनुष पर रखकर अर्जुन तक पहुँचाया जाए, तो अर्जुन को काटकर प्राण हर ले।

श्री कृष्णाष्टकम्

वसुदॆव सुतं दॆवं कंस चाणूर मर्दनम्। दॆवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दॆ जगद्गुरुम्...

श्री कृष्णाष्टकम् - आदि शंकराचार्य

भजे व्रजैक मण्डनम्, समस्त पाप खण्डनम्, स्वभक्त चित्त रञ्जनम्, सदैव नन्द नन्दनम्...

श्री दुर्गा माँ के 108 नाम

अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली, आशावादी, भगवान् शिव पर प्रीति रखने वाली, ब्रह्मांड की निवास, संसार बंधनों से मुक्त करने वाली...

पार्वती वल्लभा अष्टकम्

नमो भूथ नाधम नमो देव देवं, नाम कला कालं नमो दिव्य थेजं...

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