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प्राचीन शिव शनि मंदिर @Noida, Uttar Pradesh

रतनगढ़ माता मंदिर @Pali, Madhya Pradesh
गुह्येश्वरी शक्ति पीठ @Kathmandu, Nepal
प्राचीन काल में दशरथ नामक प्रसिद्ध चक्रवती राजा हुए थे। राजा के कार्य से राज्य की प्रजा सुखी जीवन यापन कर रही थी...
भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली यह पवित्र व्रत सोलह सोमवार व्रत कथा भक्ति भारत के द्वारा आप तक पहुंचाई जा रही है। एक समय की बात है देवों के देव भगवान महादेवजी, पार्वती के साथ भ्रमण करते हुए मृत्युलोक में अमरावती नगरी में आए।
अब आप मुझे श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है।
बाल समय रवि भक्षी लियो तब।.. लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।...
नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च। नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:॥
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ज्ञानघन ।.. गोष्पदी कृत वारीशं मशकी कृत राक्षसम् ।..

शिव चालीसा - जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला.. शिव चालीसा लिरिक्स के सरल शब्दों से भगवान शिव को आसानी से प्रसन्न होते हैं

हनुमान चालीसा लिरिक्स | जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ राम दूत अतुलित बल धामा | बुरी आत्माओं से मुक्ति के लिए, शनि के प्रकोप से बचने हेतु हनुमान चालीसा का पाठ करें

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥
दादा देव महाराज राजस्थान के टोंक में टोडारायसिंह के सोलंकी वंश के एक प्रसिद्ध संत थे। उन्होंने 717 AD (VS 774) में 120 वर्ष की आयु में समाधि ली थी।
श्री नारायण गुरु भारत में एक दार्शनिक, आध्यात्मिक नेता और समाज सुधारक थे।
भक्तमाल | गोस्वामी तुलसीदास | असली नाम - रामबोला दुबे | गुरु - नरहरिदास | आराध्य - श्री रामचंद्र, भगवान शिव
संत रामदास जी महाराज का जन्म भिंड जिले के मदरोली गांव में एक धार्मिक चचोर सनाढ्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनमें सादगी, भक्ति और ईश्वर के प्रति अगाध प्रेम की गहरी भावना थी।

भगवान श्री कृष्ण की कर्म स्थली के नाम से विश्व विख्यात द्वारका शहर गुजरात व भारत के आखिरी पश्चिमी छोर पर स्थित है।...

नई दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम के शीर्ष मा आदि शक्ति, मां दुर्गा और मां काली मंदिरों की सूची...

आइए जानें मध्य प्रदेश के मुरैना जिला के प्राचीन, ऐतिहासिक एवं वास्तु के लिए विश्व प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में..
जेठ की तपती दोपहर थी। कलकत्ता के एक व्यस्त बाजार में ईस्ट इंडिया कंपनी का एक अंग्रेज कर्मचारी घूम रहा था। जिज्ञासावश वह दुकान पर पहुँचा और बूढ़े दुकानदार से पूछा..
एक ब्राह्मण था, वह घरों पर जाकर पूजा पाठ कर अपना जीवन यापन किया करता था। एक बार उस ब्राह्मण को नगर के राजा के महल से पूजा के लिये बुलावा आया।
एक बार नारद जी ने भगवान से प्रश्न किया कि प्रभु आपके भक्त गरीब क्यों होते हैं?
12 ज्योतिर्लिंगों में दर्शन और स्पर्श के नियम हर मंदिर में एक जैसे नहीं हैं। कुछ मंदिरों में श्रद्धालुओं को सीधे पवित्र शिवलिंग का स्पर्श करने या पूजा करने की अनुमति होती है, जबकि अन्य मंदिरों में शिवलिंग को छूने पर प्रतिबंध होता है और दर्शन निर्धारित दूरी से करने होते हैं।
जब भी किसी शुभ और शुभ कार्य का शुभ मुहूर्त देखा जाता है तो उसमें भद्रा का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है और कोई भी शुभ कार्य भद्रा के समय को छोड़कर दूसरे मुहूर्त में किया जाता है।
यह एकादशी तिथियाँ केवल वैष्णव सम्प्रदाय इस्कॉन के अनुयायियों के लिए मान्य है | ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026
ऑस्ट्रेलिया में, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, कृष्ण भक्तो के लिए वर्ष के सबसे शुभ और उत्सव मुखर दिन है।