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इस्कॉन चौपाटी @Mumbai, Maharashtra

इस्कॉन मंदिर दिल्ली @Delhi, New Delhi
मदन मोहन मंदिर करौली @Kota, Rajasthan
संतोषी माता व्रत कथा | सातवें बेटे का परदेश जाना | परदेश मे नौकरी | पति की अनुपस्थिति में अत्याचार | संतोषी माता का व्रत | संतोषी माता व्रत विधि | माँ संतोषी का दर्शन | शुक्रवार व्रत में भूल | माँ संतोषी से माँगी माफी | शुक्रवार व्रत का उद्यापन
भारतवर्ष में एक राजा राज्य करता था वह बड़ा प्रतापी और दानी था। वह नित्य गरीबों और ब्राह्मणों...
फिर क्या था, भगवान शिव अर्धनारीश्वर से पूरे नारी-रूप बन गये। श्रीयमुना जी ने षोडश श्रृंगार कर दिया।..
भगवान श्री विष्णु के 1000 नाम! विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता...
अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं॥
महायोगपीठे तटे भीमरथ्या, वरं पुंडरीकाय दातुं मुनींद्रैः ।

बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम । अरुण अधर जनु बिम्बफल, नयन कमल अभिराम ॥

अरि मद मान मिटावन हारी । मुण्डमाल गल सोहत प्यारी ॥ अष्टभुजी सुखदायक माता ।...

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥
सद्गुरु भारत के कोयम्बटूर में स्थित ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और प्रमुख हैं। ईशा आश्रम आध्यात्मिक, पर्यावरण और शैक्षिक गतिविधियों का एक प्रसिद्ध केंद्र है।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती एक भारतीय धार्मिक नेता थे। 1982 में, वे द्वारका, गुजरात में द्वारका शारदा पीठम के शंकराचार्य बने और बद्रीनाथ में ज्योतिर मठ के कार्यवाहक भी बने।
असली नाम - भाई जेठा | गुरु - गुरु अमर दास जी | जन्म स्थान - लाहौर | जन्म - शुक्रवार, 9 अक्टूबर 1534 | मृत्यु - शनिवार, 16 सितंबर 1581
वैवाहिक स्थिति - विवाहित | पिता - भाई हरि दास जी | माता - माता अनूप देवी जी
कमलेश डी. पटेल, जिन्हें 'दाजी' के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु, ध्यान मार्गदर्शक, लेखक और हार्टफुलनेस आंदोलन के वर्तमान वैश्विक मार्गदर्शक हैं। वे हार्टफुलनेस मेडिटेशन सिखाते हैं, जो राजा योग की सहज मार्ग प्रणाली का एक आधुनिक तरीका है।

पुरी भारत के चार धाम में से एक धाम है। जानिए, जगन्नाथ पुरी के शीर्ष प्रसिद्ध मंदिरों की सूची...

बृजभूमि अथवा ब्रिजभूमि भगवान कृष्ण की बचपन से संबंधित गतिविधियों से जुड़ा क्षेत्र है।

भगवान श्री कृष्ण की कर्म स्थली के नाम से विश्व विख्यात द्वारका शहर गुजरात व भारत के आखिरी पश्चिमी छोर पर स्थित है।...
फिर उसने अपनी जेब में हाथ डाल कुछ सौ-सौ के नोट गिने। सामान्य कटोरे की भाँति समझ कर कौड़ियां इक्कट्ठे करने में लगे हुए हैं।..
यह घटना १९९० की है, जब मैं परम वन्दनीया माताजी से दीक्षा लेकर पहली बार नवरात्रि अनुष्ठान में था। इससे पहले कि मैं घटना का जिक्र करूँ...
शीघ्र सफलता का मंत्र | एक युवक ने एक संत से कहा - महाराज, मैं जीवन में सर्वोच्च शिखर पाना चाहता हूँ लेकिन इसके लिए मैं निम्न स्तर से शुरुआत नहीं करना चाहता।
ऑस्ट्रेलिया में, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, कृष्ण भक्तो के लिए वर्ष के सबसे शुभ और उत्सव मुखर दिन है।
जन्माष्टमी कनाडा भर में हिंदू समुदाय द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है ।
द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका: जगत मंदिर में प्रतिदिन पांच ध्वजारोहण होता है। भक्त ध्वजाजी के आध्यात्मिक रूप का सम्मान करते हैं और भक्ति, सम्मान, शुद्ध प्रेम और विश्वास के प्रतीक के रूप में उन्हें नमन करते हैं। इस ध्वज को लेकर भक्तों में इतनी श्रद्धा और भक्ति है कि कभी-कभी इसे चढ़ाने के लिए भक्तों को दो साल तक इंतजार करना पड़ता है।
महाकुंभ की शान हैं अखाड़े। महाकुंभ में अखाड़े केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। तपस्वियों, संतों और आध्यात्मिक अभ्यासकर्ताओं से बने ये समूह भारत की आध्यात्मिक परंपराओं में गहराई से निहित हैं।