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Top Mandirs

  • Maa Brahmani Temple


    Maa Brahmani Temple

    माँ ब्रह्माणी मंदिर (Maa Brahmani Temple) is the largest center of faith in Etawah, Ferozabad, Agra, Bhind, Gwalior, Mainpuri, Auraiya district and other adjoining areas, popular identity as Barmani.

  • Babadi Mandir Labhaua

    The Shiv-Shakti temple attached with the Babadi built by the royal family of Labhaua Estate is known as बाबड़ी मंदिर लभौआ (Babadi Mandir Labhaua). Establishment of the temple is approximately 400 years old.

  • Shri Siddha Peeth Sant Ashram

    Pagal Baba Mandir originally called as श्री सिद्ध पीठ संत आश्रम (Shri Siddha Peeth Sant Ashram), people also use name Shri Shani Dev Mandir and Lakhanpura Mandir exchangeably.

  • Shri Balaji Maharaj Shakti Peeth Dham

    श्री बालाजी महाराज शक्ति पीठ धाम (Shri Balaji Maharaj Shakti Peeth Dham) dedicated to Shri Hanuman - Balaji. Newly constructed Jaharveer Darwar behind hawan shala dedicated to Baba Jaharveer Ji (Gogaji or Goagga or Gogga Ji).

  • Shree Ayyappa Temple

    श्री अय्यप्पा मंदिर (Shree Ayyappa Temple) is the blessing destination of Lord Ganesha, Lord Ayyappa and Maa Durga. Temple architecture is astro-proof with the guidance for Shri Edavalam Narayanan Nampoothiri.

  • Shri Radha Krishna Mandir

    श्री राधा कृष्ण मंदिर (Shri Radha Krishna Mandir) established on January 24, 2016 with Shri Ganesh and Shri Hanumant Lal by temple committee in Dwarka sub-city of Delhi.

आरती: ॐ जय जगदीश हरे!

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

आरती: श्री बृहस्पति देव

जय वृहस्पति देवा, ऊँ जय वृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगा‌ऊँ...

श्रीविष्णुपञ्जरस्तोत्रम्॥

प्रवक्ष्याम्यधुना ह्येतद्वैष्णवं पञ्जरं शुभम्। नमोनमस्ते गोविन्द चक्रं गृह्य सुदर्शनम्॥

स्वस्ति / स्वस्तिक मंत्र

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः। स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः। स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः। स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥

जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे।

जो करते रहोगे भजन धीरे धीरे। तो मिल जायेगा वो सजन धीरे धीरे।

उठ जाग मुसाफिर भोर भई...

उठ जाग मुसाफिर भोर भई, अब रैन कहाँ जो सोवत है।...

हे दयामय आप ही संसार के आधार हो।

हे दयामय आप ही संसार के आधार हो। आप ही करतार हो हम सबके पालनहार हो॥

हमारे साथ श्री रघुनाथ तो...

हमारे साथ श्री रघुनाथ तो किस बात की चिंता। शरण में रख दिया जब माथ तो किस बात की चिंता।

दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान बालाजी मंदिर!
दिल्ली के प्रसिद्ध हनुमान बालाजी मंदिर!

नई दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम के प्रमुख भगवान हनुमान/बालाजी मंदिरों की सूची...

द्वारका, गुजरात के विश्व विख्यात मंदिर!
द्वारका, गुजरात के विश्व विख्यात मंदिर!

भगवान श्री कृष्ण की कर्म स्थली के नाम से विश्व विख्यात द्वारका शहर गुजरात व भारत के आखिरी पश्चिमी छोर पर स्थित है।...

नोएडा के प्रसिद्ध मंदिर!
नोएडा के प्रसिद्ध मंदिर!

नोएडा भारत की धार्मिक आस्था के काफी नजदीक जान पड़ता है, आइए जानते हैं यहाँ के प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में...

श्री हनुमान बाहुक

असहनीय कष्टों से हताश होकर अन्त में उसकी निवृत्ति के लिये गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमानजी की वन्दना आरम्भ की जो कि ४४ पद्यों के हनुमानबाहुक प्रसिद्ध स्तोत्र लिखा।

ऐ मालिक तेरे बंदे हम!

ऐ मालिक तेरे बंदे हम, ऐसे हो हमारे करम, नेकी पर चले और बदी से टले, ताकी हँसते हुये निकले दम...

प्रार्थना: दया कर दान विद्या का हमे परमात्मा देना!

देश के एक हजार से ज्यादा केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालय में बच्चों द्वारा सुबह की सभा में गाई जाने वाली हिंदी प्रार्थना! दया कर दान विद्या का हमे परमात्मा देना...

संकट मोचन हनुमानाष्टक

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर। वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥

चालीसा: श्री हनुमान जी

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥

श्री नवग्रह चालीसा॥

श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिरनाय। नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय॥...

माँ महाकाली - जय काली कंकाल मालिनी!

जय काली कंकाल मालिनी, जय मंगला महाकपालिनी॥ रक्तबीज वधकारिणी माता...

चालीसा: माँ सरस्वती जी।

जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥

वट सावित्री व्रत कथा।
वट सावित्री व्रत कथा।

भद्र देश के एक राजा थे, जिनका नाम अश्वपति था। भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान न थी...

रोहिणी शकट भेदन, दशरथ रचित शनि स्तोत्र कथा!
रोहिणी शकट भेदन, दशरथ रचित शनि स्तोत्र कथा!

प्राचीन काल में दशरथ नामक प्रसिद्ध चक्रवती राजा हुए थे। राजा के कार्य से राज्य की प्रजा सुखी जीवन यापन कर रही थी...

भगवान राम के राजतिलक में निमंत्रण से छूटे भगवान चित्रगुप्त!
भगवान राम के राजतिलक में निमंत्रण से छूटे भगवान चित्रगुप्त!

जब भगवान् राम दशानन रावण को मार कर अयोध्या लौट रहे थे, तब उनके खडाऊं को राजसिंहासन पर रख कर राज्य चला रहे राजा भरत...

मैं सावंरे की कुदरत से हैरान हूँ!

वृंदावन शहर में एक वैघ थे, जिनका मकान भी बहुत पुराना था। वैघ साहब अपनी पत्नी को कहते कि जो तुम्हें चाहिए एक चिठ्ठी में लिख दो दुकान पर आकर पहले वह चिठ्ठी खोलते।

जब प्रभु को बाल सफेद करने पड़े!

एक राजा ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर बनवाया और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया...

असल में ज्ञानी कौन?

सन्तोष मिश्रा जी के यहाँ पहला लड़का हुआ तो पत्नी ने कहा: बच्चे को गुरुकुल में शिक्षा दिलवाते है...

दशरथकृत शनि स्तोत्र

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च। नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:॥

श्री शनैश्चर सहस्रनाम वली

ॐ अमिताभाषिणे नमः। ॐ अघहराय नमः। ॐ अशेषदुरितापहाय नमः।...

श्री शनि अष्टोत्तर-शतनाम-नामावली

ॐ शनैश्चराय नमः॥ ॐ शान्ताय नमः॥ ॐ सर्वाभीष्टप्रदायिने नमः॥ ॐ शरण्याय नमः॥ ॐ वरेण्याय नमः॥

श्री दुर्गा माँ के 108 नाम

सती, साध्वी, भवप्रीता, भवानी, भवमोचनी, आर्या, दुर्गा, जया, आद्य, त्रिनेत्र, शूलधारिणी...

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