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अथ श्री बृहस्पतिवार व्रत कथा | बृहस्पतिदेव की कथा

भारतवर्ष में एक राजा राज्य करता था वह बड़ा प्रतापी और दानी था। वह नित्य गरीबों और ब्राह्‌मणों...

गोपेश्वर महादेव की लीला

फिर क्या था, भगवान शिव अर्धनारीश्वर से पूरे नारी-रूप बन गये। श्रीयमुना जी ने षोडश श्रृंगार कर दिया।..

भागवत कथा प्रसंग: कुंती ने श्रीकृष्ण से दुख क्यों माँगा?

भागवत कथा प्रसंग: कुंती ने श्रीकृष्ण से उपहार में दुख क्यों माँगा? श्रीकृष्ण ने पूछा कि ऐसा क्यों बुआ, तुम्हें दु:ख ही क्यों चाहिए। कुंती ने जवाब दिया कि जब जीवन में दु:ख रहता है तो तुम्हारा स्मरण भी रहता है।

विष्णु सहस्रनाम: M.S.Subbulakshmi

भगवान श्री विष्णु के 1000 नाम! विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता...

मधुराष्टकम्: अधरं मधुरं वदनं मधुरं

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं॥

श्री पांडुरंग अष्टकम्

महायोगपीठे तटे भीमरथ्या, वरं पुंडरीकाय दातुं मुनींद्रैः ।

अन्नपूर्णा चालीसा
अन्नपूर्णा चालीसा

विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय । नित्य आनंद करिणी माता, वर अरु अभय भाव प्रख्याता..

गणेश चालीसा
गणेश चालीसा

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल। श्री गणेश चालीसा के संपूर्ण हिंदी लिरिक्स और अर्थ यहाँ पढ़ें। भगवान गणेश की कृपा पाने और सुख-समृद्धि के लिए नियमित रूप से चालीसा का पाठ करें।

हनुमान चालीसा
हनुमान चालीसा

हनुमान चालीसा लिरिक्स | जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ राम दूत अतुलित बल धामा | बुरी आत्माओं से मुक्ति के लिए, शनि के प्रकोप से बचने हेतु हनुमान चालीसा का पाठ करें

सद्गुरु

सद्गुरु भारत के कोयम्बटूर में स्थित ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और प्रमुख हैं। ईशा आश्रम आध्यात्मिक, पर्यावरण और शैक्षिक गतिविधियों का एक प्रसिद्ध केंद्र है।

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती एक भारतीय धार्मिक नेता थे। 1982 में, वे द्वारका, गुजरात में द्वारका शारदा पीठम के शंकराचार्य बने और बद्रीनाथ में ज्योतिर मठ के कार्यवाहक भी बने।

गुरु राम दास

असली नाम - भाई जेठा | गुरु - गुरु अमर दास जी | जन्म स्थान - लाहौर | जन्म - शुक्रवार, 9 अक्टूबर 1534 | मृत्यु - शनिवार, 16 सितंबर 1581
वैवाहिक स्थिति - विवाहित | पिता - भाई हरि दास जी | माता - माता अनूप देवी जी

कमलेश पटेल (दाजी)

कमलेश डी. पटेल, जिन्हें 'दाजी' के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु, ध्यान मार्गदर्शक, लेखक और हार्टफुलनेस आंदोलन के वर्तमान वैश्विक मार्गदर्शक हैं। वे हार्टफुलनेस मेडिटेशन सिखाते हैं, जो राजा योग की सहज मार्ग प्रणाली का एक आधुनिक तरीका है।

भारत के चार धाम
भारत के चार धाम

आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा परिभाषित चार वैष्णव तीर्थ हैं। बद्रीनाथ धाम, रामेश्वरम धाम, जगन्नाथ धाम, द्वारका धाम...

जगन्नाथ पुरी के विश्व प्रसिद्ध मंदिर
जगन्नाथ पुरी के विश्व प्रसिद्ध मंदिर

पुरी भारत के चार धाम में से एक धाम है। जानिए, जगन्नाथ पुरी के शीर्ष प्रसिद्ध मंदिरों की सूची...

बृजभूमि के प्रसिद्ध मंदिर
बृजभूमि के प्रसिद्ध मंदिर

बृजभूमि अथवा ब्रिजभूमि भगवान कृष्ण की बचपन से संबंधित गतिविधियों से जुड़ा क्षेत्र है।

दुर्लभ मनुष्य जीवन - प्रेरक कहानी

फिर उसने अपनी जेब में हाथ डाल कुछ सौ-सौ के नोट गिने। सामान्य कटोरे की भाँति समझ कर कौड़ियां इक्कट्ठे करने में लगे हुए हैं।..

देवशिशु ने जगायी सदबुद्धि - प्रेरक कहानी

यह घटना १९९० की है, जब मैं परम वन्दनीया माताजी से दीक्षा लेकर पहली बार नवरात्रि अनुष्ठान में था। इससे पहले कि मैं घटना का जिक्र करूँ...

सर्वोच्च शिखर पाना का मंत्र - प्रेरक कहानी

शीघ्र सफलता का मंत्र | एक युवक ने एक संत से कहा - महाराज, मैं जीवन में सर्वोच्च शिखर पाना चाहता हूँ लेकिन इसके लिए मैं निम्न स्तर से शुरुआत नहीं करना चाहता।

ऑस्ट्रेलिया में कैसे मनाई जाती है जन्माष्टमी?

ऑस्ट्रेलिया में, श्री कृष्ण जन्माष्टमी, कृष्ण भक्तो के लिए वर्ष के सबसे शुभ और उत्सव मुखर दिन है।

कनाडा में जन्माष्टमी समारोह

जन्माष्टमी कनाडा भर में हिंदू समुदाय द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है ।

द्वारका धाम ध्वज समारोह

द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका: जगत मंदिर में प्रतिदिन पांच ध्वजारोहण होता है। भक्त ध्वजाजी के आध्यात्मिक रूप का सम्मान करते हैं और भक्ति, सम्मान, शुद्ध प्रेम और विश्वास के प्रतीक के रूप में उन्हें नमन करते हैं। इस ध्वज को लेकर भक्तों में इतनी श्रद्धा और भक्ति है कि कभी-कभी इसे चढ़ाने के लिए भक्तों को दो साल तक इंतजार करना पड़ता है।

महाकुंभ में प्रसिद्ध अखाड़े

महाकुंभ की शान हैं अखाड़े। महाकुंभ में अखाड़े केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। तपस्वियों, संतों और आध्यात्मिक अभ्यासकर्ताओं से बने ये समूह भारत की आध्यात्मिक परंपराओं में गहराई से निहित हैं।

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